#navratri - हर नारी में है मां दुर्गा - हेमा शर्मा


हर नारी में है मां दुर्गा

संयम और सहनशीलता से भरपूर है नारी..., ममता का सागर लुटाती है नारी, करके तो देखे कोई मर्यादा की सीमा पार... तो चंडी रूप भी धर कर लेती है नारी।
परिवार में बच्चों से लेकर बड़ों तक की हर डिमांड को हंसते-हंसते पूरा करना और बीमारी में हर किसी की सेवा करना। परिवार की सुरक्षा एवं भलाई के लिए हमेशा तत्पर रहना, यहां तक कि अपनी जान तक की भी परवाह न करना। सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज बुलंद करना और न्याय के लिए लड़ जाना..., खुद पर आ जाए तो जमीं पर ही नहीं चांद पर भी कदम रख जाना, बात देश की हो तो हंसते हुए जान दे जाना... यह किसी विशेष महिला में नहीं बल्कि हर नारी में मां दुर्गा के ममता और शक्ति के गुण इस कद्र विद्यमान हैं कि समय-समय पर वह अलग रूपों में नजर आती है और कई बार तो उसके कारनामों को देख कर हैरानी हो जाती है। मां दुर्गा की तरह वह काफी साहसी है और अपनी लड़ाई अकेले लडऩा जानती है।
नारी में भी हैं नौ रूप, जो कि समय-समय पर उसमें नजर आते हैं, जिन्हें अगर आप पहले नहीं समझ पाए तो इसे पढऩे के बाद तो जरूर समझ जाएंगे।

प्रेम 

एक मां के रूप में जब वह अपने बच्चे के सिर पर प्रेम, स्नेह और वात्सल्य से भरपूर हाथ रखती है तो उसके दिल की हर ङ्क्षचता और डर दूर हो जाता है और एक बेटी के रूप में जब वह किलकारी लगा अपने पिता के गले लगती है, तो उसकी सारी थकावट और गम दूर हो जाते हैं।
जब वह किसी पुरुष से प्रेम करती है तो उसकी जीवन संगनी बन कर उसका जीवन और घर दोनो संवार देती है और जब राष्ट्र से प्रेम करती है तो देश के विकास के लिए लग जाती है। जब वह दादी-नानी बनती है तो फिर से स्नेह का भंडार अपने पोता-पोती और नातियों के लिए खोल देती है। अपना स्नेह वह अपनों पर ही नहीं, बल्कि गैरों पर भी समान रूप से लुटाती है।

सुख और शांति 

सुख और शांति का दूसरा नाम है नारी, क्योंकि दूसरों की निश्चल सेवा और देखभाल से ही उसे आत्मिक सुख मिलता है। ऐसा न होता तो शिक्षक, नर्स या फिर समाज सेवा में महिलाओं की गिनती सबसे ज्यादा न होती।
जीवन में अच्छे-बुरे के बीच के देवासुर संग्राम में वह स्वयं सेनापति है, जिसका नेतृत्व और मुकाबला वह इस तरह से करती है कि उसके परिवार की सुख और शांति कभी भंग न हो सके।

मेहनत 

वह तप की शक्ति का प्रतीक है, क्योंकि वह जानती है कि जीवन में बिना तपस्या अर्थात कठोर परिश्रम के सफलता प्राप्त करना असंभव है। यही कारण है कि महिलाएं कड़ी मेहनत से कभी दिल नहीं चुरातीं, घर से लेकर ऑफिस तक, खेतों से लेकर सडक़ बनाने तक, मॉल से लेकर कॉरपोरेट वल्र्ड तक तथा सुरक्षा से लेकर राजनीति तक की हर फील्ड में महिलाओं की जी तोड़ मेहनत का लोहा आज हर कोई मानता है। अब तो टाईम मैनेजमैंट एवं हार्ड वर्क में महिलाओं को अव्वल मानते हुए प्रोफेशनल फील्ड में उन्हें बड़ी से बड़ी जिम्मेदारी भी सहज ही सौंप दी जाती है।

दृढ़ता एवं स्थिरता 

हिमालय के समान वह शक्ति, दृढ़ता, आधार व स्थिरता की प्रतीक है और एक नारी में ये सारे गुण एक साथ देखे जा सकते हैं, क्योंकि जीवन प्रबंधन में दृढ़ता, स्थिरता व आधार का महत्व सबसे अधिक है। अपना कोई भी काम वह बिना योजना बनाए आरंभ नहीं करती और एक बार जब वह अपने कर्तव्य के पालन में जुटती है तो फिर पीछे नहीं हटती।

ऊर्जा एवं शक्ति 

नारी भले ही अपनी ऊर्जा और शक्ति का प्रयोग दूसरों की भलाई करती हो, परंतु यदि कोई उसे या उसके परिवार को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे तो वह मां दुर्गा की तरह उसका मुकाबला ही नहीं करती, बल्कि संहार करने से भी नहीं हिचकती, जिसके इतिहास से लेकर अब तक कई उदाहरण देखे जा सकते हैं।

आत्मविश्वास 

आज की लड़कियों में कुछ कर गुजरने का जोश ज्यादा ही देखा जाता है, क्योंकि वे हर फील्ड में तथा हर काम को वे आसानी से कर सकती हैं। यह उनका आत्म विश्वास ही है कि हर काम को करने की काबिलियत उन्होंने खुद में पैदा की है और हर फील्ड में कामयाबी हासिल की है।
आज की नारी न केवल अपनी हर बात मुखर ढंग से कहना जानती है, बल्कि सही और अपने हक के लिए लडऩा भी जानती हैं।

सहनशक्ति 

प्रकृति का रूप होने के कारण नारी में सहन शक्ति की पराकाष्ठा भी सबसे ज्यादा होती है, यही कारण है कि सृजन एवं पालन का अधिकार भी ईश्वर के पश्चात नारी के पास ही होता है। यही नहीं अपने संयम के चलते ही वह स्वयं को सुख में ही नहीं दुख में भी माहौल के अनुरूप ढाल लेती है।

प्रेरणा 

जन्म के बाद बच्चे को बोलना सीखने से लेकर पहला कदम उठाने तक की प्रेरणा देती है मां...। कभी प्रेमिका बन कर प्रेमी के  शायर बनने की प्रेरणा बनती है तो कभी जंग पर जाते पति के लिए साहस और पराक्रम की प्रेरणा बन जाती है। कभी किसी वैज्ञानिक की खोज की गुमनाम रहने वाली प्रेरणा बनती है और कभी शाहजहां के लिए ताजमहल के निर्माण की प्रेरणा बनती है, अर्थात जीवन में ऊपर उठने के लिए सबकी प्रेरणा बनने वाली नारी ने अपने लिए कभी दूसरों का मुंह नहीं देखा और जीवन पथ पर अपने कदमों को निरंतर बढ़ाए रखा।

सौंदर्य 

सौंदर्य की मिसाल है नारी, केवल बाहरी ही नहीं बल्कि मन, विचार, व्यवहार और गुणों में उसकी खूबसूरती झलकती है। अपनी खूबसूरती की महक जब वह चारों ओर बिखेरती है तो मानों काली रात्रि में पूनम का चांद दमक उठता है। वह मात्र भोग्या ही नहीं आस्था का भी रूप है, न होता ऐसा तो नवरात्रि में कंजक पूजन न होता और न ही हर धाॢमक समारोह में नारी की उपस्थिति अनिवार्य होती।
हेमा शर्मा

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