बच्चे हंसते-खेलते ही अच्छे लगते हैं, परंतु जब बच्चे का मिजाज बिगड़ जाता है, तो पेरेंटस के चेहरे पर चिंता की लकीरों को गहरा देता है। ऐसे समय में शांत रहना ही वह तरीका है, जो माहौल और बच्चे के मिजाज को सुधार सकता है। बहुत सी मांएं अपने रोते बच्चे के चेहरे पर हंसी ले आती हैं तथा जिद करते बच्चे को आसानी से मना लेती हैं।
आप सोच रही होंगी कि भला बच्चों के बिगड़े मिजाज को इतनी आसानी से कैसे संभाला जा सकता है, माना कि ऐसा कर पाना कठिन है परंतु नामुमकिन नहीं है। बस जरूरत तो इस बात की है कि आप छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखें और उन्हें अपनी आदत में शामिल कर लें।
शांत रहें
कभी फिल्म देखते हुए सिनेमा घर में, तो कभी पार्क में घूमते हुए या फिर मार्केट में शॉपिंग करते हुए छोटे बच्चे या तो जिद करने लगते हैं या फिर रोना शुरू कर देते हैं, ऐसे में लोगों का ध्यान अपनी तरफ हुआ देख कर अभिभावकों का पारा भी बढ़ जाता है, जिससे कि बच्चे का मिजाज और बिगड़ जाता है। पब्लिक प्लेस पर जब भी बच्चा ऐसी स्थिति उत्पन्न करे, तो शांति के साथ उसके स्वभाव और पसंद के अनुसार उसे बहलाने का प्रयास करें, इससे आपका नन्हा भी आसानी से मान जाएगा।
ध्यान बांटें
जब कभी आपका बच्चा अपने ट्रैक से भटकना शुरू करे, तो ऐसे में उस पर गुस्सा होने की अपेक्षा उसके ध्यान को बांटने की कोशिश में जुट जाएं। यदि आपकी ट्रिक कारगर रही तो आपका ऐसा करना आपके बच्चे को शांत रखने में मदद करेगा। ध्यान भटकाने का यह नुस्खा तभी काम करेगा, जब आप शांति से उस स्थिति को संभालेंगी।
रिलैक्स होना सीखें
अभिभावक की भूमिका में समय-समय पर आपके धैर्य की परीक्षा होती है। जब आपके बच्चे ने अपना आपा खो दिया हो, तो उस समय उसे संभालना मुश्किल हो जाता है। ऐसी परिस्थिति में पहले आप गहरी सांस ले कर खुद को रिलैक्स करें। आपको अपने बच्चे के साथ शांत रहना सीखना होगा, वह भी तब जब उसे इस बात का भी ख्याल न हो कि उसे कैसा व्यवहार करना चाहिए।
जादू की झप्पी दें
बच्चे के जिद और गुस्से का जवाब गुस्से से नहीं, बल्कि एक प्यारी सी मुस्कुराहट से दें तथा उसे गले से लगा कर जादू की झप्पी दें या फिर उससे अच्छी-अच्छी बातें करें। यह तरकीब तब काम आएगी जब आपका अपने बच्चे के साथ भावनात्मक जुड़ाव हो। यदि आपका बच्चा रो रहा है, तो खुद शांत रहें तथा उससे उसकी पसंद की बातें करना शुरू करें। आप उसे चॉकलेट या उसकी मनपसंद खाने की चीज दे सकती हैं, परंतु इस बात का ख्याल रखें कि आपके बच्चे को इसकी लत ही न लग जाए। ऐसा होने पर वह अपनी बात मनवाने के लिए रोना या जिद करना शुरू कर सकता है।
सजा और पुरस्कार
आप सजा और पुरस्कार दोनों तकनीकों को यूज कर सकती हैं। यहां सजा का मतलब बच्चे की पिटाई करना नहीं है। आप बच्चे की गलती पर उसे उसकी पसंद की चीज देना बंद कर सकती हैं, इससे बच्चा आपकी बात पर गौर करना सीख जाएगा।

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