जिंदगी में अगर कुछ सबसे ज्यादा जरूरी है तो वो है खुद की जिंदगी ...
आज दिन में बॉलीवुड सुशांत राजपूत की सुसाइड की खबर सुनी, तो लगा कि किसी ने फेक खबर उड़ाई होगी, खुल कर लबों से बाहर आती जिंदादिल मुस्कान और बोलती आंखों वाले सुशांत अपनी निजी जिंदगी से लेकर पर्दे पर अभिनय करते हुए हर किसी को अपना दीवाना बना लेते थे, ऐसा इंसान सुसाइड जैसा कदम कैसे उठा सकता है। फिर लगा कि आज जो दौर चल रहा है, जिसमें हर इंसान नौकरी, काम और पैसे को लेकर आर्थिक मंदी के दौर से निकल रहा है और बिगड़ते आर्थिक हालात से अंदर ही अंदर टूट रहा है, शायद ऐसे ही हालात में सुशांत राजपूत भी टूट गए होंगे। हालांकि ऐसा नहीं था सुशांत के टूटने की वजह उनका अकेलापन था, वह अकेलापन जो स्ट्रेस के अलावा कुछ दे ही नहीं सकता, ऐसे में केवल और केवल दोस्त ही हैं, जो कि स्ट्रेस में जा रहे इंसान को जिंदगी की ओर मोड़ लाते हैं। सवाल यह भी उठता है कि सुशांत जैसे जिंदादिल इंसान के जीवन में दोस्तों की कमी हो, ऐसा कहा नहीं जा सकता, परंतु जानने वाले लोगों की भीड़ तो भले ही आपके आसपास कितनी ही क्यों न हो, चुनिंदा लोग ही आपके दोस्त हो सकते हैं, उनमें भी केवल एक-दो ऐसे होते हैं, जिनसे आप दिल की बात कह सकते हैं, जिन्हें आप बेस्ट फ्रेंड कह सकते हैं।
दर्द कोई गहरा होगा
वर्ष 2019 में आई उनकी एक फिल्म का डायलॉग रह-रह कर जेहन में गूंज रहा है कि हम हर जीत, सक्सेस और फेलियर में इतना उलझ गए हैं कि जिंदगी जीना भूल गए हैं। जिंदगी में अगर कुछ सबसे ज्यादा जरूरी है तो वो है खुद की जिंदगी...। इस डायलॉग ने ना जाने कितने ही लोगों की जिंदगी चुपचाप बदल दी होगी और उन्हें जिंदगी से प्यार करना सिखा दिया होगा, परंतु वजह कोई बड़ी ही होगी, दर्द कोई गहरा ही होगा कि सुशांत चुपचाप खामोशी से उसे अंदर ही अंदर सहते रहे होंगे और किसी से कुछ न कहा होगा। कहते हैं जब दर्द हद से बढ़ जाए और सहा न जाए, तो इंसान ऐसा ही कदम उठा जाता है। उनकी मौत की असली वजह तो पोस्टमार्टम एवं पुलिस तफ्तीश के बाद ही सामने आ पाएगी, परंतु यदि माना जाए कि वजह अकेलापन और डिप्रेशन है, तो दोस्तों एवं परिवार वालों को यह समझना होगा कि हर मुस्कराने वाला शख्स खुश हो यह जरूरी नहीं, दोस्त की हंसी के पीछे का दर्द आपको पहचानना होगा, उसके शब्दों का मर्म आपको समझना होगा।
यदि आपका भी कोई दोस्त ऐसे ही हालात गुजर रहा हो, तो उसका साथ दें, क्योंकि जीवन की मुश्किल घड़ी में ही दोस्तों की पहचान होती है। कई बार जीवन में ऐसे पल भी आ जाते हैं जब किसी भी इंसान के लिए खुद को संभालना बेहद मुश्किल हो जाता है और परिणाम में अक्सर लोग सुशांत राजपूत जैसा कदम उठा लेते हैं। ऐसे विकट समय में यदि आपको खुद को और साथ ही दूसरों को भी संभालना आ जाए तो हालात को कुछ बेहतर किया जा सकता है। अपने दोस्त को स्ट्रेस एवं अकेलेपन से निकालने के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना होगा, ताकि वह दुख के दौर से बाहर निकल आए और जिंदगी से उसे फिर से प्यार हो जाए।
सलाह नहीं साथ दें
जीवन में कुछ भी खोने का दर्द ही आगे चल कर डिप्रेशन में बदल जाता है, कभी सुना है कि जिसे कोई दर्द नहीं वह इंसान डिप्रेशन में चला गया हो, इसलिए अपने दोस्त के दर्द को समझें, जीवन में जो नुक्सान उसने सहा है उसे महसूस करें। डिप्रेशन में गए इंसान को किसी भी सलाह की जरूरत नहीं होती, क्योंकि सलाह उसके मन की पीड़ा को कहीं भी कम नहीं कर पाती है, उसे लगता है कि आप उसका दर्द समझ ही नहीं पा रहे हैं, तो आप कैसे दोस्त हैं। बस ऐसे पलों में उसका साथ दें, एक्स्ट्रा केयर करके उसे दयनीय महसूस ना कराएं, बल्कि अपनी दोस्ती को पहले जैसा ही रखते हुए कुछ थोड़ा सा ज्यादा वक्त उसके साथ नॉर्मली बिताएं। आपका साथ और आपकी बातें उसे बिना कुछ कहे ही डिप्रेशन से बाहर ले आएंगी और वह फिर से पहले जैसा ही हो जाएगा।
खोने वाले को भूला नहीं जा सकता
याद रखें कि किसी के भी जीवन में सबसे मुश्किल पल वही होते हैं, जब वह अपने किसी को खो देता है, अत: उस समय उन्हें गलती से भी सब कुछ भूल कर आगे बढऩे की सलाह न दें, क्योंकि किसी भी खोने वाले को एकदम से भुलाया नहीं जा सकता, क्योंकि दिल, दिमाग और जीवन पर उसका गहरा असर होता है। दिलासा देने के चक्कर में अक्सर लोग यह भी कह देते हैं कि जो होता है अच्छे के लिए होता है, यही होनी है या फिर सब ठीक हो जाएगा, परंतु इस तरह की बातों से आप अपने दोस्त का दुख कम करने की जगह और बढ़ा देते हैं।
घूमने निकल जाएं
यदि आपका दोस्त डिप्रेशन में या किसी वजह से खुद को अकेला महसूस कर रहा है, तो दो-चार दोस्त इकट्ठे हो कर कहीं घूमने निकल जाएं, अपनी उसी मस्ती को वापिस ले आएं, जो कि सब दोस्त लोग मिल कर किया करते थे। पहली या दूसरी बार में शायद आपको सफलता न मिले, परंतु धीरे धीरे आपका दोस्त डिप्रेशन से निकल आएगा। इस बात का ध्यान रखें कि डिप्रेशन से निकलने में लोगों को कई महीनें लग जाते हैं, परंतु उन्हें अहसास दिलाएं कि आप हमेशा उनके साथ हैं, इस तरह से उन्हें अपना दुख भूलने में मदद मिलेगी, यदि वे न जाना चाहें, तो इस बात के लिए उनके साथ जबरदस्ती बिल्कुल न करें।
प्रोफेशनल की सलाह लें
कुछ लोग समय बीत जाने के बाद भी अपने गम से बाहर नहीं आ पाते तथा अंदर ही अंदर अपने दुख को लेकर घुटते रहते हैं और लोगों से मेल-जोल खत्म कर देते हैं। ऐसे में आप उन्हें किसी प्रोफेशनल के पास ले जाएं, इससे उन्हें अपने दुख से उबरने में सहायता मिलेगी।

Well said
ReplyDeleteSatish Awasthi ji Thanks
ReplyDeleteSSR death is sad. But let us not turn it into media circus. Some TV anchors are going hammer and tongs at Rhea. Poor girl. Let us wait for the outcome of CBI enquiry and wait for the court verdict. It is clear that the unfortunate death is being used for political propaganda as well.
ReplyDeleteसही कहा आपने सर, दोष साबित होने से पहले ही किसी को सजा सुना देने का काम आज सोशल मीडिया और मीडिया करने लगा है, किसी को किसी की तकलीफ और दर्द से लेना देना नहीं। जो काम जांच एजेंसियों का एवं कोर्ट का है, उसे भी ये लोग ही करने लगे हैं।
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