दोस्ती की ऐसी बातें न पड़ जाएं भारी ( हेमा शर्मा )

यूं ही हर किसी से दोस्ती नहीं हो जाती, यह रिश्ता सिर्फ उन लोगों से ही गहरा हो पाता है, जो लोग आपके अंतर्मन को समझ सकें, जिनकी दोस्ती आपके परिवार या जिम्मेवारियों के आड़े न आए। कई बार दोस्तों की कुछ आदतें न भाने से दोस्ती टूटने की कगार पर भी आ खड़ी होती है। ऐसे में अपने दोस्त को एक अच्छे दोस्त की तरह सुधारना भी सीखें और जरूरत पड़ने पर खुद को बदलना भी सीखें, ताकि आप भी गुनगुना सकें कि ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे...। 

जब दोस्त ईर्ष्या करने लगे  

कई बार ऑफिस में प्रमोशन मिलने से आपके  बेस्ट फ्रैंड को भी आपसे ईर्ष्या हो जाती है, ऐसे में अपने ही दोस्त के बिहेवियर में जलन का भाव देख कर किसी को भी टैंशन होना लाजिमी है, सो उसे बताएं कि बहुत सी चीजें वक्त के साथ ही संभव हो पाती हैं, सो कल उसे भी तो प्रमोशन मिल सकता है, बस मेहनत करते रहो। इस प्रकार दो दोस्तों के दिलों में पड़ने वाली दीवार को समय रहते ही मिटाया जा सकता है। 

शिकायत करने वालों से बचें

ऐसे दोस्तों की भी कमी नहीं जिन्हें हमेशा आपसे कोई न कोई शिकायत रहती हो। हर बार कमी गिनाने वाले लोग पॉजीटिव सोच वाले नहीं हो सकते। अत: जरूरी है कि उसकी अधिकांश शिकायतों को उसकी आदत जान कर नजर अंदाज करना आरंभ करें। जब भी वह आपसे शिकायत करने लगे तो बात का टॉपिक ही बदल दें, यदि फिर भी वह न समझे, तो उसे साफ.-साफ  कह दें कि हर समय अपनी कमी सुनना अपको पसंद नहीं और वह भी अपने नेगेटिव थॉटस छोड़ कर पॉजीटिव बातों की तरफ ध्यान दे।

हमेशा सलाह देने वालों से बचें

कुछ लोगों की आदत होती है कि अपने फ्रैंडस को परेशान देख कर बिना उसकी परेशानी का सबब जाने ही उसे सलाह देने बैठ जाएंगे, बिना यह जाने कि उसे इसकी जरूरत है भी या नहीं। ऐसे दोस्तों को लगता है कि आपमें किसी प्रकार का फैसला लेने की क्षमता नहीं है और आपकी भलाई हमेशा उन्हें ऐसा करने को प्रेरित करती रहती है।

अब भले ही आपको यह सब बुरा लगे, पर इतनी सी बात पर दोस्ती कोई नहीं तोड़ता, सो अबकी बार जब वह आपको बिन मांगे सलाह देने लगे तो बड़े प्यार से उसे यह समझाएं कि आप उसकी सलाह एवं राय का आदर करते हैं पर आप भी दूसरों की तरह अपनी ही गल्तियों से सीखना चाहती हैं। यदि आपको उसकी सलाह की जरूरत होगी तो आप स्वयं उससे सलाह मांग लेंगे, तब तक उन्हें खुद ही इसका हल ढूंढने दिया जाए। 

खुद करें पहल 

दोस्ती एक ऐसा फेवीकोल है जो बिखरते रिश्तों को मजबूती से जोडऩे का काम करता है। यदि आप किसी दूसरे से बेहतर बनना चाहते हैं, तो उसके दोस्त बन जाएं, फिर आपको उससे प्रतिस्पर्धा करने में तनाव भी नहीं होगा और आपको एक नया दोस्त भी मिल जाएगा, जिससे आप प्रतिदिन कुछ नया सीखेंगे। 

नए रिश्तों को बनाने में पहल किसी को तो करनी ही होती है, तो क्यों न आप ही शुरूआत करें, क्योंकि प्रतिद्वंदी को ही अपना अच्छा दोस्त बनाने से बेहतर ओर क्या हो सकता है। 

बीती बातों को भुलाना बेहतर 

कभी किसी दोस्त के लिए गुस्से में अपशब्द निकल गए हों तो उसे भुला कर उससे माफी मांग लें, क्योंकि बीती बातों को दोहराने का कोई लाभ नहीं। माफी मांग लेने से आप एक अच्छे दोस्त को खोने से बच जाएंगे और साथ ही उसकी नजरों में आपका स्थान और ऊंचा हो जाएगा।

दिलों की कड़वाहट को मिटाने के लिए सबसे अच्छा उपाय है कि वर्तमान में जीना सीखा जाए तथा दुश्मन के आगे भी दोस्ती का हाथ बढ़ाया जाए, फिर देखें कि दोस्ती की गर्मी से दुश्मनी की बर्फ  भी पिघल जाएगी।

आत्म निर्भर बनाएं

यदि आपका कोई मित्र अपने छोटे से छोटे काम के लिए भी आप पर ही निर्भर करता है, जैसे ट्रेन रिजर्वेशन से लेकर इंटरव्यू देने जाने तक तथा बैंक से लेकर शॉपिंग करने जाने तक के कामों के लिए उसका साथ देते हुए आपका अपना काम भी सफर कर रहा है, तो उसे आत्मनिर्भर बनने में मदद करें, क्योंकि छोटी-छोटी बातों के लिए दोस्तों पर निर्भर रहने से एक दिन दोस्ती खतरे में पड़ जाती है। 

ऐसे में आप स्वयं में भी बदलाव लाएं तथा अपने दोस्त को उतना ही वक्त दें, जितना आप रोजमर्रा के कामों से निकाल कर दे सकें। उसे यह सब उस समय समझाएं, जब वह बिल्कुल नॉर्मल हो कर सुनने के मूड में हो, नहीं तो उसे लगेगा कि आप दोस्ती तोडना चाहते हैं।


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