गुरु: देवो भव: ( हेमा शर्मा )

लॉक डाउन के कारण स्कूल भले ही बंद हैं और बच्चे स्कूलों से दूर अपने घरों में बंद हैं, फिर भी वे अपने टीचर्स से दूर नहीं हैं, ऑनलाइन क्लासेज के कारण उनकी अपने टीचर्स से हर रोज ही मुलाकात हो जाती है, पहले जैसी मस्ती भले ही न हो, परंतु फिर भी टीचर्स और स्टूडेंट्स का ये रिश्ता बना हुआ है। शिक्षक दिवस का अर्थ साल में एक दिन बच्चों द्वारा टीचर्स को भेंट किया गया एक गुलाब का फूल या कोई गिफ्ट नहीं हो सकता और न ही यह टीचर दिवस मनाने का सही तरीका कहा जा सकता है। एक दिन गुरु की वंदना में भाषण दे कर या गीत गा कर उन्हें सम्मानित नहीं किया जा सकता, बल्कि जरूरत तो है कि हम विद्यार्थी जीवन में ही नहीं बल्कि ता-उम्र उनका आदर करें। वे शिक्षक ही तो हैं जो इंजीनियर, डॉक्टर, प्रबंधक, नेता एवं अभिनेताओं का निर्माण करते हैं। बच्चों में संभावनाओं का विकास कर उन्हें देश को उन्नति की राह पर ले जाने की शिक्षा देते हैं और एक दिन उनकी मेहनत नजर भी आती है। आज जिस दौर से हम गुजर रहे हैं, उसमें अपने स्टूडेंट्स के मनोबल को टीचर्स ने कहीं भी काम नहीं होने दिया। 

खुद को बदलना होगा 

वक्त के साथ टीचर्स ने तो खुद को बदलना शुरू कर दिया है, परंतु ऑनलाइन क्लासेज होने के कारण आज बच्चों  एवं टीनएजर्स को भी बदलना होगा, मैंने देखा है कि बच्चे अपने टीचर को वह सम्मान देना ही नहीं चाहते हैं, अभी भी वे लोग अपने टीचर्स के साथ बदतमीजी से बात करते हैं और कोई चीज समझ न आने पर उसका दोष भी अपने टीचर को देने से नहीं हिचकते हैं।  ये सही है कि ऑनलाइन क्लासेज का ट्रेंड अभी भारत में नया है, सो इस क्लास रूम के नियम भी अलग ही होंगे, सो हर किसी को उसकी लिमिट को समझ कर ही अपना बेहेवियर तय करना होगा। 
- स्क्रीन पर कुछ न कुछ लिख कर आप टीचर को ही डिस्टर्ब नहीं करते हैं, बल्कि आप अपना समय भी नष्ट करते हैं। 
- वीडियो ऑफ कर देना या माइक ऑन कर कोई भी साउंड निकालना किसी भी लहजे से सही नहीं माना जा सकता है। 
- यह सही है कि चैट बॉक्स का ऑप्शन है, परंतु क्लास में दोस्तों से चैट न करें। 

कहीं तो कमी है

शिक्षक को हम विद्या का वरदान देने वाले भगवान का दर्जा देते आए है। उनके प्रति हमारे मन में असीम आदर एवं सम्मान छिपा होता है तभी तो शिक्षक भी ज्ञान के साथ प्यार और स्त्रेह की बरसात करते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि छात्र अपने ही शिक्षकों के साथ या शिक्षक अपने ही छात्रों के साथ इस प्रकार का व्यवहार कैसे कर सकते हैं, इसे बदलते वातावरण का दोषी माना जाए या फिर घर से मिलने वाले संस्कारों की कमी समझा जाए, जो वे जरा-जरा सी बात को ईगो बना लेते हैं।  

शिक्षक का महत्व 

शिक्षक दिवस का सही महत्व समझने के लिए सबसे पहले इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि आप एक स्टूडेंट हैं अर्थात उम्र एवं अनुभव में अपने शिक्षक से काफी छोटे हैं और फिर हमारे संस्कार भी हमें यही सिखाते हैं कि हमें अपने से बड़ों का आदर करना चाहिए। अपने गुरू का आदर-सत्कार करते हुए, उनकी बात को ध्यान से सुनना और समझना चाहिए। अगर आपने अपने क्रोध एवं ईष्र्या को त्याग कर अपने अंदर संयम के बीज बोए तो निश्चित ही आपका व्यवहार आपको बहुत ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

शिक्षक को भी इस बात को समझना होगा कि घर से बाहर बच्चे उनसे शिक्षा लेने आते हैं, सो उन्हें सुरक्षित एवं स्नेहभरा वातावरण देनेे की हर शिक्षक की जिम्मेवारी है।

 किसी दिन की जरूरत नहीं

यूं तो सही मायने में देखा जाए तो गुरु: देवो भव: के आध्यात्म को मानने वाले देश में शिक्षकों के प्रति आदर एवं सम्मान व्यक्त करने के लिए किसी एक दिन की जरूरत नहीं, बल्कि उनका आदर सत्कार तो आप दिल से हमेशा कर सकते हैं। गुरु का अपमान मां का अपमान करने के समान माना जाता है।

इसी प्रकार शिक्षकों को भी इस बात को समझना होगा कि वे छात्रों के जीवन में रोशनी फैला कर उन्हेंं सही दिशा दिखाते हैं और उनका आचरण एवं व्यवहार ता-उम्र बच्चों का मार्ग दर्शन करता है। भले ही आज कंप्यूटर युग हो, फिर भी विद्यार्थी सबसे ज्यादा विश्वास अपने शिक्षक की बताई बात पर ही करता है।

यदि किसी बच्चे से पूछें कि वह बड़ा होकर क्या बनना चाहता है तो उसका यही जवाब होगा कि उसे अपने टीचर जैसा बनना है। सो शिक्षकों को अपनी छवि फिर से ऐसी बनानी होगी कि उनका सम्मान हर पल, हर दिन और हर समय हो तभी तो ज्ञान का भंडार देने वाले शिक्षकों को सही मायने में एक बार फिर दिल से पूजा जाएगा। 

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