Hindi Poetry

 

Hema Sharma

मुझे पढ़ने का शौक है भले ही वह किताबें हों 

नॉवेल हो चेहरे हों या फिर आँखें ही क्यों न हों 

इनमें कुछ कहानियां जानी-पहचानी सी होती हैं 

तो कुछ किस्से-कहानियां अनजानी सी होती हैं 

कुछ जाहिर तो कुछ छुपने की कोशिश करते हैं 

हां मेरी निगाहों के सामने से रूप बदलते हुए से 

कई खामोश एहसास अल्फ़ाज़ बनके निकलते हैं 

हेमा शर्मा 

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