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| Hema Sharma |
मुझे पढ़ने का शौक है भले ही वह किताबें हों
नॉवेल हो चेहरे हों या फिर आँखें ही क्यों न हों
इनमें कुछ कहानियां जानी-पहचानी सी होती हैं
तो कुछ किस्से-कहानियां अनजानी सी होती हैं
कुछ जाहिर तो कुछ छुपने की कोशिश करते हैं
हां मेरी निगाहों के सामने से रूप बदलते हुए से
कई खामोश एहसास अल्फ़ाज़ बनके निकलते हैं
हेमा शर्मा

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