बेहद सुरीली आवाज और लंबी हेक की मल्लिका गुरमीत बावा नहीं रही (Punjabi Folk Singer Gurmeet Bawa Passes Away)

फेमस पंजाबी लोक गायिका का निधन 
Gurmeet Bawa 

जुगनी, मिर्जा, डोली तथा हीर जैसे गीतों को दी आवाज 

लंबे समय से थीं बीमार 

संगीत जगत और प्रशंसकों में शोक की लहर 

जुगनी, मिर्जा, डोली तथा हीर गाने वाली तथा लंबी हेक देने वाली पंजाबी लोक गायिका सुरों की मल्लिका गुरमीत बावा अब नहीं रहीं, परंतु उनकी आवाज उनके गीत हमेशा उनके प्रशंसकों के दिलों में एक अमर याद बन कर गूंजते रहेंगे। उनके देहांत की खबर से पंजाबी फिल्म और संगीत इंडस्ट्री एवं प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई, उनकी  उम्र  77 साल की थी। वह लंबे समय से बीमार चल रही थीं, शनिवार रात को तबियत खराब होने के कारण उन्हें अमृतसर के अस्पताल में एडमिट कराया गया था।  सोमवार को उनका अंतिम  संस्कार कर दिया जाएगा। 

लंबी हेक का रिकॉर्ड 

पंजाबी लोक गायकी में उनका 45 सेकेंड की हेक रिकॉर्ड था, तभी तो उन्हें लंबी हेक की मल्लिका कहा जाता था और उनका यह रिकॉर्ड कोई नहीं तोड़ पाया। इतनी देर तक रुक पाना  युवाओं के बस  है।  गुरमीत बावा दूरदर्शन पर गाने वाली पहली महिला सिंगर थीं तथा उन्होंने अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड अपने करियर में हासिल किए।  सन 1991 मे पंजाब की  सरकार ने उन्हें राज्य अवार्ड से सम्मानित किया था, इसके अलावा उन्हें पंजाब नाटक अकादमी ने संगीत पुरस्कार, 2002 में मध्य प्रदेश की सरकार ने राष्ट्रीय देवी अहिल्या अवार्ड और 2008  पंजाबी लैंग्वेज डिपार्टमेंट से शिरोमणि गायिका अवार्ड से नवाजा गया । 

पंजाबी परंपरा को रखा जीवित 

पंजाबी सभ्यता,परंपरा एवं गायकी को जीवित रखने वाली गुरमीत बावा ने कई पंजाबी गीतों को अपनी आवाज दी। पुराने समय में बॉलीवुड, पंजाबी फिल्मों एवं गानों में जितनी भी बोलियां डाली जाती थीं उनमें अधिकतर गुरमीत बावा की ही आवाज  थी।  

जीवन परिचय 

गुरमीत बावा का जन्म 1944 में गुरदासपुर के गांव कोठे में हुआ था, यह वो टाइम था जब लड़कियों को पढ़ने नहीं दिया  जाता था, परंतु उन्होंने शादी के बाद अपनी पढ़ाई पूरी की। गुरमीत गुरमीत बावा  ने पंजाबी लोक गायक किरपाल बावा से शादी की थी, उन्होंने ही गुरमीत  जेबीटी कराई, वह अपने एरिया की पहली फीमेल थी जो टीचर बनी और फिर मुंबई तक भी पहुंची।  

बेटी की डेथ के बाद से ही बीमार रहने लगी थीं 

गुरमीत बावा  की बेटी लाची बावा का देहांत पिछले साल हो गया था, उनके लिए यह दुख सह पाना आसान नहीं था, वह चुपचाप रहने लगी थीं। लोगों से मिलना-जुलना भी कम कर दिया था, जिससे उनकी  खराब रहने लगी थी। 

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