कौन हैं बिरेन कुमार बसाक जिन्होंने साड़ियां बेचते हुए तय किया पद्मविभूषण पाने तक का सफर किया तय (Who is Biren Kumar Basak whose gift was stunned by PM Modi)
| (PM thanks to Padma awardee Biren Kumar Basak for his gift) |
भारत (India) के कण-कण में कला का खजाना बिखरा पड़ा है और लोक कला (Folk Art) से जुड़े लोग अपनी कला से लोगों को अचंभित कर देते हैं, इन्हीं में एक हैं पश्चिम (West Bengal) बंगाल के बिरेन कुमार बसाक (Biren Kumar Basak), जो कि साड़ियां बेचते (selling saaries) हैं और जिन्होंने साड़ी पर रामायण (Ramayan) उकेर कर सब को अचंभित कर दिया था। इनके क्लाइंट्स में मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी (Chief Minister Mamta Banerjee), सौरव गांगुली (Sourav Ganguly), उस्ताद अमजद अली खान (Ustad Amjad Ali Khan), लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) एवं आशा भोंसले (Asha Bhosle) जैसी हस्तियां शामिल हैं।
कौन हैं बिरेन कुमार बसाक जिन्होंने साड़ियां बेचते हुए तय किया पद्मविभूषण पाने तक का सफर किया तय (Who is Biren Kumar Basak whose gift was stunned by PM Modi)
पिछले दिनों हुए एक कार्यक्रम में प्रधान मंत्री मोदी (PM Modi) ने पद्मश्री ( Padma Shri) पुरस्कार प्राप्त बिरेन कुमार बसाक को उनके उपहार के लिए धन्यवाद दिया।
एक ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा था -
“श्री बिरेन कुमार बसाक पश्चिम बंगाल के नदिया के रहने वाले हैं। वे प्रतिष्ठित बुनकर हैं, जो अपनी साड़ियों में भारतीय इतिहास और संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं। पद्मश्री पुरस्कार विजेताओं से बातचीत के दौरान, उन्होंने मुझे कुछ ऐसा उपहार दिया, जिसने मेरा मन मोह लिया।”
कौन हैं बीरेन कुमार बिसाक
बिरेन कुमार बिसाक एक समय में गलियों में फेरी लगा कर साड़ी बेचा करते थे और उनकी रोजाना की कमाई महज 2.50 रुपये थी। बिरेन का जन्म 16 मई 1951 को हुआ, वह कोलकाता के नादिया जिले के रहने वाले हैं और पेशे से साड़ी बुनने का काम करते हैं, शुरुआती दिनों में वह कंधे पर साड़ियों का गट्ठर लाद कर कोलकाता की गली में घूम कर साड़ी बेचा करते थे। आज वह करोड़ों रुपये के मालिक हैं, लेकिन एक समय था जब वह एक बुनकर के यहां 2.50 रुपये दिहाड़ी पर साड़ी बुनने का काम किया करते थे।
कौन हैं बिरेन कुमार बसाक जिन्होंने साड़ियां बेचते हुए तय किया पद्मविभूषण पाने तक का सफर किया तय (Who is Biren Kumar Basak whose gift was stunned by PM Modi)
साड़ी पर उकेरी रामायण Epic Ramayan Saree
आखिर बिरेन की मेहनत ने रंग दिखाया और कड़े संघर्ष के बाद उन्होंने अपनी साड़ी कंपनी ‘बसाक एंड कंपनी’ स्थापित की। आज इसका टर्न ओवर 50 करोड़ रुपये का है, उन्होंने साड़ी पर रामायण के सात खंड लिखे थे, जिसके लिए ब्रिटिश यूनिवर्सिटी ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया था. उन्होंने 1996 में इस साड़ी को तैयार किया था. जो 6 गज की है, धागों में रामायण उकेरने की तैयारी में उन्हें एक साल लग गया था, जबकि उसे बुनने में उन्हें लगभग 2 साल लगे थे।
कौन हैं बिरेन कुमार बसाक जिन्होंने साड़ियां बेचते हुए तय किया पद्मविभूषण पाने तक का सफर किया तय (Who is Biren Kumar Basak whose gift was stunned by PM Modi)
कई अवार्ड मिले
बसाक की छह गज की साड़ी पर यह जादुई कलाकृति उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार, नेशनल मेरिट सर्टिफिकेट अवार्ड एवं संत कबीर अवार्ड भी दिला चुकी है, उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड, इंडियन बुक ऑफ रिकार्ड्स और वर्ल्ड यूनीक रिकार्ड्स में भी दर्ज है।
| biren kumar basak |
मुंबई की एक कंपनी ने 2004 में बसाक को रामायण के सात खंड लिखी हुई साड़ी के बदले में आठ लाख रुपये देने की पेशकश की थी, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था। साड़ी पर रामायण उकेरने के बाद अब बसाक गुरु रबींद्रनाथ ठाकुर के जीवन को उकेरने तैयारी कर रहे हैं।
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Good story
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