Exclusive Interview With Nima Denzongpa aka Surbhi Das (नीमा है सुलझी हुई तो सुरभी है नटखट)



लोग असम की रानी मुखर्जी कहते थे : सुरभी  

कलर्स के नीमा डेंजोग्पा की सुरभी दास पहुंची चंडीगढ़ 
बचपन से सोच लिया था कि एक्ट्रेस ही बनना है 

सीरियल नीमा डेंजोंग्पा की एक्ट्रेस सुरभी दास (फोटो : हेमा शर्मा )

कलर्स का मशहूर शो ' नीमा डेंजोग्पा ' ढेर सारे ड्रामा और हैरतअंगेज टिवस्ट से भरपूर अपनी मजेदार कहानी से हर हफ्ते दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है। असम की रहने वाली सुरभी दास इसमें नीमा डेंजोग्पा का किरदार निभा रही हैं, जो कि आज चंडीगढ़ में अपने शो कि प्रमोशन के लिए आयी हुई थीं। उन्होंने कहा कि यह कहानी उन संघर्षों, अप्रिय प्रतिक्रियाओं और पूर्व धारणाओं को बहुत अच्छी तरह से दर्शाती है, जिसका सामना एक महिला को करना पड़ता है। तीन बेटियों के साथ जब उन्होंने अपने पति का घर छोड़ा तो उसने यह डिसाइड कर लिया था कि वह अपनी बेटियों को उज्जवल भविष्य देगी। अपनी बेटियों को वह किसी काम में रोक-टोक नहीं करती है, क्योंकि उसे विश्वास है कि उसने अपनी बेटियों को जो परवरिश दी है, वे कभी कोई गलत कदम नहीं उठाएंगी, जिससे नीमा के दिल को ठेस पहुंचे।  

कुछ कुछ खट्टी कुछ मीठी 

नीमा और सुरभी में यह समानता है कि दोनों पॉजिटिव नेचर की हैं और जीवन में कितना भी स्ट्रगल क्यों न हो दोनों ही कभी हार नहीं मानेंगी और डिफरेंस यह है कि नीमा सुलझी हुई एवं गंभीर किस्म की है जबकि सुरभी चुलबुली एवं नटखट है अर्थात दोनों कुछ कुछ खट्टी कुछ कुछ मीठी जैसी हैं।  

सपना हुआ पूरा 

सुरभी कहती हैं कि उन्होंने शुरू से ही सोचा था कि एक्टिंग में ही करियर बनाना है, स्कूल और कॉलेज में वह एंकरिंग एवं नाटकों में अभिनय किया करती थीं। पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने मॉडलिंग कि दुनिया में कदम रखा। उसके बाद उन्हें असामी शो और म्यूजिक वीडियो में अभिनय के ऑफर मिलने लगे। बचपन से ही वह मुंबई आने का सपना देखा करती थीं, जिसमें उनके पेरेंट्स ने भी अपना पूरा सहयोग दिया, अब उनका यह सपना पूरा हो चुका है और उन्होंने अपना बेस मुंबई शिफ्ट कर लिया है। सुरभि दास का कहना है कि अब वह हिंदी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में ही काम करेंगी और हार नहीं मानेंगी। सुरभि दास ने कुछ असमिया टीवी शोज में काम किया है और इस शो के बाद ही वह कोई दूसरा शो करेंगी, अभी तो उन्हें इसी शो को अपना 100 परसेंट देना है। 

सब कुछ है अलग फिर भी अपनी सी है मुंबई 

मुंबई में भीड़ बहुत है, जबकि असम में इतनी भीड़ नहीं है, यहां का कल्चर अलग है और हां फूड तो बिलकुल ही अलग है, जिसके साथ वह अभी तक कम्फर्टेबल नहीं हो पाई हैं, फिर भी मुंबई सबका स्वागत बाहें फैला कर करती है और अपनी सी लगती है।

सोच बदलनी जरूरी है 

वह कहती हैं कि इस सीरियल में नक्सलवादी भेदभाव को दिखाया गया है। लोग अक्सर नार्थ ईस्ट के लोगों को चिंकी, मोमो, चाइनीज कह कर बुलाते हैं। भी सिक्किम कि गलियों से अपने सपने को पूरा करने के लिए मुंबई आती है, जहां उन्हें नस्लवादी भेदभाव का सामना करना पड़ता है। वह कहती हैं की जब वह दिल्ली में थी तब उन्हें भी इस तरह के शब्दों का सामना करना पड़ा था, यहां तक कि उनकी खराब हिंदी के कारण भी सब उनका मजाक उड़ाते थे, परन्तु इन सबने उन्हें हिंदी सुधारने में मदद की. वह कहती हैं कि वक्त बदल रहा है तो लोगों की सोच भी बदलेगी।

रानी मुखर्जी सी मुस्कान 

सुरभी की मुस्कान एवं आवाज बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी से काफी हद तक मिलती है, वह कहती हैं कि इसका कमेंट उन्हें कई बार लोग करते हैं, उनके जानने वाले लोग तो उन्हें असम की रानी मुखर्जी कहा करते थे।

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